जनसँख्या विस्फोट बना देश के विकास में अवरोधक


       [भारत का जनसँख्या घनत्व 2011 जनगणना के अनुसार 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर थी, जबकि चीन में 2015 की गणना के अनुसार में 142 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है.अर्थात हमारे देश में जनसँख्या घनत्व चीन को काफी पीछे छोड़ चुका है.]

 देश की सुरसा की भांति बढती आबादी ने स्वतंत्रता के पश्चात् देश की प्रगति में सर्वाधिक प्रभावित किया है. देश की सुरसा की भांति बढती जनसँख्या जो आजादी के समय मात्र चौतीस करोड़ पचास लाख थी, आज एक सौ इक्कीस करोड़ हो चुकी है. भारत का जनसँख्या घनत्व 2011 जनगणना के अनुसार 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर थी, जबकि चीन में 2015 की गणना के अनुसार में 142 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है.अर्थात हमारे देश में जनसँख्या घनत्व चीन को काफी पीछे छोड़ चुका है. बढती आबादी ने अडसठ वर्षों में हुई सारी प्रगति को प्रभाव हीन कर दिया है. देश में खाद्य उत्पादन जो 1950-51 में 50.83 मिलियन टन था 2013-14 में बढ़ कर 263 मिलियन टन तक पहुँच गया.इतना बड़ा उत्पादन इसलिए संभव  हो पाया क्योंकि कृषि भूमि क्षेत्रफल 1960 में 133 मिलियन हेक्टयर था 2010 में बढ़ कर 142 मिलियम हेक्टयर हो गया और प्रति हेक्टेयर उपज जो 1960 में 700 किलो प्रति हक्टेयर थी 2010 में वैज्ञानिक संसाधनों का अधिकतम प्रयोग करने के कारण बढ़ कर 1900 किलो प्रति हेक्टेयर हो गयी अर्थात उपलब्ध साधनों का अधिकतम उपयोग किये जाने के पश्चात् ही यह संभव हो पाया. अब  और अधिक वृद्धि होने की सम्भावना नहीं हो सकती. खाद्य उत्पादन में इतनी वृद्धि होने के बावजूद,आर्थिक असन्तुलन के कारण आज भी  देश की बहुत बड़ी जनसँख्या को एक समय का भोजन ही नसीब होता है.वर्तमान समय में देश में पर्याप्त खाद्य भण्डार होने के कारण, खाद्य तेलों के अतिरिक्त अन्य  खाद्य पदार्थ को विदेश से मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती. परन्तु यदि जनसँख्या वृद्धि नहीं रूकती है तो अवश्य ही हमें खाद्यान्न भी विदेशों से मंगा कर ही जनता का पेट भरना पड़ेगा. खाद्यान्न के अतिरिक्त अन्य सभी उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में आशातीत वृद्धि होने के बावजूद देश की सारी जनता के लिए सारी वस्तुएं,सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पायीं हैं. अतः गरीबी बढती जाती है दूसरी तरफ बढती आबादी ने बेरोजगारी के ग्राफ को कहीं अधिक किया है जिसके कारण भी गरीबी को बढ़ावा मिलता है,देश का विकास प्रभावित होता है

            अधिक आबादी के कारण सड़कों पर ट्रैफिक नित्य प्रति बढ़ रहा है जिसके कारण सड़कों पर जाम तो लगता ही है, प्रदूषण की मात्रा भी भयावह स्थति तक पहुँच जाती है.जिससे अनेक प्रकार की बीमारियों को निमंत्रण मिलता है इसका प्रभाव अधिक  आबादी वाले शहरों पर अधिक पड़ता है.अच्छे स्वास्थ्य के बिना विकास का कोई महत्व नहीं रह जाता.शेष भाग पढने के लिए क्लिक करें…….    http://jarasochiye.com/single.aspx?id=GP231671


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