गंगा का महत्त्व


हिन्दू धर्म में गंगा नदी को मां के रूप में पूजा जाता है.अर्थात गंगा को देवी देवताओं का स्थान प्राप्त है। गंगा का महत्त्व है इसका गंगा जल, जो मनुष्य के लिय स्वास्थ्य करी है,जिससे मानव के अनेक त्वचा रोग एवं पेट के रोगों से मुक्ति मिलती है। यही करण है ,हमारे पूर्वजों ने इसे पूजनीय माना। परन्तु वही पवित्र गंगा आज अपने हाल से व्यथित है। गंगा जल गंदे नाले के पानी में बदल चुका है। आखिर क्यों? क्यों हो गया गंगा जल प्रदूषित? कौन कर रहा है इसे प्रदूषित? क्या गंगा को अपवित्र करने में जिनका हाथ है वे हिन्दू नहीं हैं। हमारी धार्मिक मान्यता कहाँ चली जाती है, जब हम उसमें मल-मूत्र, मानव शरीर की अस्थियाँ , कल कारखानों से निकला कचरा,रसायन और दूषित पानी बहा देते हैं। क्या गंगा को प्रदूषित करने के लिय हम स्वयं जिम्मेदार नहीं हैं?उसके बाद परम्पराओं के अनुरूप गंगा को पवित्र मान कर उसमें स्नान करते है, डुबकी लगते हैं। और अपने को धन्य मानते है.और अनजाने में ही अनेक रोगों को आमंत्रित कर देते है। कैसी है यह धार्मिक आस्था?
हिंदू धर्म के अनुसार गंगा में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं, अर्थात कुछ भी गलत कार्य करिए, यानि हत्या मारकाट ,प्रतारणा आदी और फिर गंगा में स्नान कर लो सारे गुनाह माफ़? कैसी ही यह आस्था जो अपराधों को अपरोक्ष रूप से आमंत्रित करती है?
धर्म के दो आयामी रूप विचित्र स्थिति पैदा करते है.गंगा की पवित्रता का तार्किक कारण न समझ कर धार्मिक अंधविश्वास में लिप्त रहते हैं.पवित्र गंगा हमारे पूर्वजों की धरोहर है इसको स्वच्छ बनाय रखना हमारा कर्तव्य है.


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