हर शाख पर उल्लू बैठा है


हर शाख पर उल्लू बैठा है. देश को गुलामी से निजात मिलने के पश्चात् हमारे नेताओं का इतना अधिक नैतिक पतन हो गया है, की अब हमारा देश दुनिया में घोटालों का देश के नाम से प्रसिद्द हो रहा है. जनता का आक्रोश उभर कर आया, श्री अन्ना.जी के आमरण अनशन के रूप में.और फिर अपार जान समूह अन्ना जी के समर्थन में भ्रष्टाचार की लड़ाई के लिए उठ खड़ा हुआ. अन्ना जी ने देश को एक दिशा प्रदान कर उम्मीद की किरण दिखाई है. उन्होंने बताया किस प्रकार देश व्यापी भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल सकती है. देश को कैसे न्यायप्रिय,इमानदार शासन, प्रशासन उपलब्ध कराया जा सकता है. आज देश का प्रत्येक नागरिक नित ने खुल रहे करोडो रुपयों के घोटालों से सकते में है, व्यथित हैं,निराश है.परन्तु हमारे नेता हमारे नौकर शाह जनता से बेखबर अपनी तिजोरियां भरने में व्यस्त हैं. वे व्यस्त हैं अपने दश की अपार सम्पदा को विदेशी बैंकों में जमा कराने में, अपनी आगे आने वाली सात पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करने में. परन्तु क्या सिर्फ नौकरशाहों एवं राजनेताओं को ही भ्रष्ट कहना उचित होगा ?आम जनता भी अनैतिकता के गर्त में डूब चुकी है. आज स्थिति यह बन गयी है जहाँ जिसका जिस प्रकार भी दांव लगता है छोड़ना नहीं चाहता .प्रत्येक व्यक्ति धन का उपासक बन चुका है,अब उसके लिए चाहे हिंसा का सहारा लेना पड़े या फिर किसी का शोषण करना पड़े ,सब कुछ जायज हो चुका है. देश के लिए, समाज के लिए, कानून पालन के लिय कोई भी सोचने को तैयार नहीं है. एक फैक्ट्री मालिक हो या दुकानदार, नकली,मिलावटी वस्तुएं बनाने एवं बचने से नहीं हिचकता,फिर चाहे मिलावट की वस्तु या नकली वस्तु के कारण किसी की जान भी चली जाय तो क्या? एक मिस्त्री किसी भी उपकरण की रिपेयर करता है,तो मजदूरी के अतिरिक्त झूंठे बिल द्वारा ग्राहक की जेब काटना अपने व्यवसाय का हिस्सा मानता है, एक डॉक्टर अपनी आमदनी के लालच में मरीज को अनावश्यक पथोलोजी टेस्ट की सलाह देकर कमीशन बटोरता है,या फिर मरीज को बेवजह ओप्रशन की टेबल तक ले जाता है.,एक वकील अपनी ऊंची फीस पाने के लिए बेगुनाह को सजा दिला कर गर्व का अनुभव करता है,छोटे से छोटे से स्तर का व्यक्ति भी सरकारी कार्यालयों में अपना काम जल्दी कराने के लिए सरकारी कर्मचारी को लालच देता है,उसे घूस देने की पेशकश करता है ,मतदाता अपने मत की कीमत वसूल कर किसी को भी चुनाव जीता देता है. कुल मिला कर भ्रष्टाचार,लूट,चोरी,अनैतिकता हर जगह पर मोजूद है. सिर्फ नेताओं एवं भ्रष्ट नौकरशाहों को सुधारने से ही काम चलने वाला नहीं है.आवश्यकता है,सुधार ऊपर से लेकर निचले स्तर तक हो, आम आदमी की मानसिकता में बदलाव हो,उसे अपने व्यवसाय में इन्सनिअत को जोड़ना होगा,उसे देश के कानून, देश के सम्मान की रक्षा करनी होगी. बिजली चोरी,मुफ्त रेल यात्रा टैक्स अपवंचन जैसे नैतिक अपराधों से स्वयं को मुक्त करना होगा. तब ही देश खुशहाल एवं विकसित देशों की श्रेणी में आ सकेगा.


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